गजल

संगीत की शास्त्रीयता से लेकर गज़लों  की रुह को छूने वाले उस्ताद

रुहानी सुकून और सुरों की सच्चाई के पीछे प्रत्येक कलाकार की रियाज लगातार चलती रहती है… गुलाम मुस्तफा खान साहेब के इंतकाल ने अपने आप

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