
रस, संवाद और सहृदयता: कला का अधूरा आयाम
भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपरा केवल साधना, तकनीक और प्रस्तुति का संयोजन नहीं है; यह मूलतः एक जीवंत संवाद है – गुरु और शिष्य के बीच, कलाकार और दर्शक के बीच, और सबसे महत्वपूर्ण, कलाकार से कलाकार के बीच। इस संवाद की आत्मा सहृदयता है – दूसरे के








































