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शास्त्रीय संगीत, विश्व संगीत और लोकसंगीत की त्रिवेणी सुनने मिलेगी तानसेन समारोह में

सुर मिलेंगे गले मिलेंगे… मधुरता बांटेगे, और बांटेगे प्रेम का संदेश… तानसेन की नगरी ग्वालियर में 25 दिसंबर से आरंभ हो रहे 97वे विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह में विश्व संगीत के सुरों के साथ ही परंपरागत प्रस्तुतियों को भी सुनने मिलेगा। कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुतियों के साथ ही चर्चाओं का दौर भी चलेगा।

तानसेन समारोह 25-30 दिसंबर तक आयोजित किया गया है। उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे ने तानसेन समारोह की जानकारी देते हुए बताया कि समारोह में युवा संगीतकारों के साथ साथ लब्ध प्रतिष्ठित देश विदेश के कलाकार भी प्रस्तुतियां देंगे।

तानसेन समारोह संपूर्ण कार्यक्रम के लिए क्लीक करें 
कला यात्राओं का आयोजन

तानसेन समारोह में इस बार नए आयाम जोड़े जा रहे हैं। समारोह की पूर्व संध्या यानि 25 दिसम्बर को किलागेट के साथ-साथ महाराज बाड़ा से भी भव्य कला यात्रा निकलेगी। कला यात्रा में ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिलों के लोक कलाकार और कला रसिक शामिल होंगे।

ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिलों से विशेष वाहनों द्वारा कला जत्थे आयेंगे और फूलबाग पर इनका एकत्रीकरण होगा। इसके बाद सभी कला जत्थे महाराज बाड़ा पहुँचेंगे। महाराज बाड़ा से लेकर गमक आयोजन स्थल यानि इंटक मैदान हजीरा तक आधा दर्जन स्थानों पर कला जत्था जिलेवार 10 – 10 मिनट की प्रस्तुतियां देंगे। पहली प्रस्तुति महाराज बाड़ा पर, इसके बाद गश्त का ताजिया, जयेन्द्रगंज, लक्ष्मीबाई समाधि, लोको और तानसेन नगर तिराहे पर कला जत्था में शामिल लोक कलाकार अपने-अपने अंचल की लोकधारा बहायेंगे। इसके बाद कला यात्रा इंटक मैदान पर पहुँचकर तानसेन समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित होने वाले उप शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम गमक का आनंद लेंगे।

कला यात्रा में शामिल होने वाले श्रेष्ठ दल को 50 हजार रूपए का नगद पुरस्कार दिया जायेगा। इसी तरह तीन लोकल बॉडी के कला दल को भी पुरस्कार दिए जायेंगे। प्रथम दल को 31 हजार, द्वितीय को 21 हजार व तृतीय स्थान पर आने वाले दल को 11 हजार रूपए का पुरस्कार नगर निगम द्वारा दिया जायेगा।

संगीत और पर्यटन की जुगलबंदी – तानसेन समारोह के साथ दर्शक पर्यटन का भी आनंद ले सकेंगे

सुरों के साथ सैर सपाटे का भी आनंद मिले तब निश्चित रुप से दर्शको को तानसेन समारोह का आनंद द्विगुणित हो जाएगा। म.प्र शासन के संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने इस बार सही मायने में जुगलबंदी कर तानसेन समारोह में संगीत के साथ पर्यटन को जोड़कर काफी बेहतरीन कार्य किया है। इस बार तानसेन समारोह में विदेशो से विश्व संगीत की प्रस्तुति देने के लिए कलाकार भी आ रहे है और जिस प्रकार भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति विदेशी दर्शकों की रुची बढ़ती जा रही है उसके अनुसार विदेशी दर्शक भी कार्यक्रम सुनने के लिए आएंगे।

प्रदेश सरकार ने इस बार संगीत और पर्यटन की जुगलबंदी कर सभी दर्शकों के लिए अलग चंबल संभाग के सभी जिलों से आयेंगे रसिक व पर्यटक टुरिस्ट पैकेज का लाभ उठाकर संगीत के साथ पर्यटन का भी आनंद उठा सकते है।

इस बार ग्वालियर एवं चंबल संभाग के सभी जिलों से संगीत रसिक और पर्यटन प्रेमी जोड़े जा रहे हैं। अन्य जिलों से आने वाले कला रसिकों को टूरिज्म पैकेज के तहत तानसेन समारोह के साथ-साथ  ग्वालियर के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कराया जायेगा। टूरिज्म पैकेज का खर्च कलारसिक स्वयं उठायेंगे।

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दतिया जिले के लिये विशेष टूर पैकेज

तानसेन समारोह के दौरान रसिकों एवं पर्यटकों की सुविधा के लिये दतिया जिले की पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद द्वारा एक विशेष टूर पैकेज तैयार किया गया है।  तानसेन समारोह की प्रात:कालीन एवं सांध्यकालीन सभा के बीच के लगभग 6 घंटे के भीतर पर्यटकगण दतिया के टूरिज्म पैकेज का लाभ उठा सकते हैं। दतिया जिले के टूरिज्म पैकेज में माँ पीताम्बरा माई के दर्शन व वीर सिंह महल सहित दतिया की अन्य ऐतिहासिक विरासतों का भ्रमण और शाम के समय सनसेट का अद्भुत दृश्य का अवलोकन शामिल है। पर्यटन विभाग ने इस हेतु पैकेज की दर भी काफी कम की गई है।

आर्ट टुरिज्म को इसी तरह बढावा देना होगा

म.प्र सरकार ने जिस प्रकार से आर्ट टुरिज्म को बढ़ावा देने की पहल की है उसे आम जनता के बीच में लोकप्रिय बनाने की भी पहल करना होगी। आम जनता को यह बताना होगा कि संगीत के सुरों के आनंद के साथ अपने प्रदेश की अमूल्य पर्यटन धरोहरो पर भी जा सकते है।

भारत की मूर्तिकला बेहद लोकप्रिय

हमारे देश में मूर्तिकला को लेकर इतनी विविधता है जितनी कहीं पर भी देखने को नहीं मिलती। दक्षिण के मंदिरों की कला और मूर्तिकला अपने आप में खूबसूरत है वहीं उत्तर के राज्यों में मूर्तिकला बेहद लोकप्रिय है।  खजुराहो के मंदिरों से लेकर ग्वालियर और उसके आसपास के क्षेत्र में ही मूर्तिकला के नायाब उदाहरण है वही देश की बात करें तब  कोणार्क के सूर्य मंदिर से लेकर चित्तोड के किले तक ऐसे किलें और मंदिर है जो विदेशी पर्यटको को काफी आकर्षित कर सकते है।

कला दीर्घाओं में भी विदेशी पर्यर्टको की रुची रहती है 

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यूरोप में कई ऐसी बेहतरीन आर्ट गैलेरीज है जो अपने यहां पर आर्ट टूर करवाती है। हमारे देश में भी विश्वस्तरीय आर्ट गैलेरीज है जिन्हें आर्ट टूरिज्म में शामिल किया जा सकता है। नई दिल्ली की द नेशनल गैलेरी ऑफ़ मार्डन आर्ट,गर्वमेंट म्युजियम चैन्नई,जहांगीर आर्ट गैलेरी मुंबई, गर्वनमेंट म्युजियम एंड आर्ट गैलेरी चंडीगढ़ । इसके अलावा मध्यप्रदेश में मैहर में अलाउद्दीन खां साहेब के घर से लेकर वहां से जो नामी गिरामी कलाकार निकले है उनके बारे में जानकारी दी जा सकती है।

कलाकारों के घर पर उन्हें रियाज करते देखना भी पसंद करते है पर्यटक

आर्ट टूरिज्म का एक बड़ा आकर्षण होता है आर्टिस्ट होम विजिट। पर्यटकों को सीधे रुप से आर्टिस्ट से या तो आर्ट गैलेरी में मुलाकत करने को मिल जाती है या फिर कलाकार के घर पर जाकर मुलाकात करने को मिलती है। इसमें आर्टिस्ट का भी फायदा होता है और पर्यटकों को कलाकार को काम करते हुए देखना भी अच्छा लगता है। कलाकार अपने बारे में भी बताता है साथ ही अपनी कला को लेकर भी पर्यटकों को जानकारी देता है और पर्यटक कला को सीख सकते है।

निश्चित रुप से संगीत और पर्यटन की जुगलबंदी अपने आप में काफी सुंदर और सुखद है। प्रदेश सरकार को आगे आने वाले अन्य समारोहों के लिए इस प्रकार के प्रयास करने होंगे और छोटे प्रयासों से ही बड़ी सफलता मिलेगी।

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